अध्ययन हो चाहे अनुसन्धान, अध्ययनोपयोगी सर्वविध साहित्यका एकत्र उपलब्ध होना अपने आपमें एक बड़ी सिद्धि मानी जाती है। इससे भी बडी सिद्धि है उपलब्ध साहित्यमेंसे अपेक्षित सन्दर्भादिको समय पर खोज पाना।
कल्पना कीजीये कि: दुरूह पंक्तिओंको पढ़ते बखत उसका सरल अनुवाद-विवेचन आपके सामने आ जाये, जटिल पारिभाषिक शब्दोंसे सामना होने पर उनकी परिभाषा तुरंत प्राप्त हो जाये, शास्त्रकी गहराईयोंमेंसे उद्धृत वचनोंके स्थान-सन्दर्भ तत्क्षण उपलब्ध हो जायें, विषयसे सम्बद्ध किन्ही अन्य ग्रन्थोंको देखनेकी इच्छा होने पर वो भी यथेच्छ उपलब्ध हो जायें, और इतना ही नहीं, कभी भी किसी शब्द या वाक्य को पूरे ग्रन्थ साहित्यमेंसे खोजना हो तो वह भी कुछ क्षणोंमें आपके सामने आ जाये!
इससे अधिक किसी अध्येताको ओर क्या चाहिये? पढ़ते समय महत्त्वपूर्ण वाक्यों की नोट् आप अपने सन्दर्भकेलिये, बिना कागज-कलमके भी, बना सकें तो! श्रीवल्लभाचार्य ट्रस्ट, मांडवी-कच्छने भगवत्कृपासे एवं आचार्यचरणोंके अनुग्रहके बलसे इन बातोंको सत्य सिद्ध करनेका प्रयास किया है।
श्रीवल्लभाचार्य ट्रस्ट, मांडवी-कच्छ

